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| मेडिसिन में सदस्यों की दिलचस्पी बढ़ी |
पहले वह क्लर्क और ऑफीसर भेजते थे मगर अब एशियाई सदस्य संगठनों ने फुटबॉल मेडिसिन सेमीनार का महत्व समझते हुए इस विधा से जुड़े लोग भेजना शुरू किए है।
पिछले सप्ताह एएफसी वार्षिक समारोह में एशिया की मैदान और उसके बाहर की सफलता का जश्न मनाया गया मगर स्पोर्ट्स मेडिसिन द्वारा पाई गई सफलता की कहानी उससे अछूती रही।
एक समय ऐसा था जब स्पोर्ट्स मेडिसिन शिक्षा के प्रयासों सफल नहीं होते थे मगर वर्ष 2008 में एएफसी ने तीन फुटबॉल मेडिसिन के सेमीनार कराए।
यह सेमीनार एएफसी महिला एशियन कप, एएफसी अंडर-16 और एएफसी अंडर-19 चैम्पियनशिप के दौरान कराए गए।
एएफसी मेडिसिन विभाग के प्रमुख डॉ. गुरूचरण सिंह ने कहा कि इन सेमीनारों की सफलता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इस बार सदस्य संगठनों का प्रतिनिधित्व क्वालिफाईड मेडिकल से जुड़े लोगों ने किया।
“पहले के सेमीनारों में अपेक्षानुरूप नतीजे नहीं मिले थे क्योंकि सदस्य संगठनों द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों की योग्यता पर प्रश्नचिन्ह थे।“
“तब कुछ योग्य नहीं थे अथवा फुटबॉल से जुड़े नहीं थे। विशेषकर कुछ को तो स्पोर्ट्स मेडिसिन में भी दिलचस्पी नहीं थी।“
“ऐसा देखा गया था कि टीम डॉक्टर और फिज़ियो को इन सेमीनारों से दूर रखा जाता था।“
“इसके बाद एएफसी ने इसके लिए दिशा-निर्देश बनाए ताकि सही व्यक्ति इनमें भाग ले सके।“
शिक्षा स्पोर्ट्स मेडिसिन की नींव है और इसीलिए यह सेमीनार एशियाई डॉक्टरों और फिज़ियो के लिए महत्वपूर्ण है।
“एएफसी इस विधा में पारंगत लोगों की संख्या बढ़ाने को लेकर कटिबद्ध है। यह जरूरी है कि खिलाड़ियों को पेशेवर मदद मिले जो अंतरराष्ट्रीय स्तर के अनुसार हो।“
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