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| भारत एसीएल के प्ले ऑफ में |
शंघाई: अगले साल शुरू होने वाले नए एएफसी चैम्पियंस लीग में दस देशों को सीधे प्रवेश दिया गया है जबकि भारत को प्ले ऑफ के जरिए इसमें भाग लेने का अवसर मिलेगा।
यह लीग एशियाई फुटबॉल में पेशेवर युग की शुरूआत साबित होगा और 32 टीमों की इस स्पर्धा में जापान, दक्षिण कोरिया, चीन, ईरान और सऊदी अरब से चार-चार क्लब भाग लेंगे।
भाग लेने के कड़े मापदंड पूरे करने वाले अन्य देश है – यूएई (तीन क्लब), ऑस्ट्रेलिया (दो), उज़बेकिस्तान (दो), कतर (दो) तथा इंडोनेशिया (एक)।
यूएई और इंडोनेशिया को इसके अलावा प्ले ऑफ में भी एक-एक क्लब उतारने की अनुमति दी गई है जिसमें भारत, सिंगापुर, थाईलैंड और वियतनाम से एक-एक क्लब खेलेंगे। एएफसी कप के विजेता और उपविजेता क्लबों को भी प्ले ऑफ में जगह मिलेगी।
एसीएल प्ले ऑफ में खेलने शर्त यह है कि एएफसी चैम्पियंस लीग के मापदंड के अनुसार क्लब व्यावसायिक प्रतिष्ठान होना चाहिए अन्यथा उन्हें एएफसी कप में खेलने को आमंत्रित किया जाएगा।
इन दस देशों का चयन 14 दावेदारों की सूची में से किया गया जिसमें प्रबन्धन, तकनीकी स्तर, दर्शक संख्या, प्रशासन, मार्केटिंग, मीडिया कवरेज, स्टेड़ियम क्षमता आदि को देखा गया था।
जापान, दक्षिण कोरिया, चीन, ईरान और सऊदी अरब ने सभी वर्ग में सबसे ज्यादा अंक हासिल किए जिसके कारण उनके यहाँ से चार-चार टीमों को प्रवेश मिलेगा।
यूएई ने तीन क्लब को स्थान पाने जितने पर्याप्त अंक हासिल किए थे तो उनके चौथे क्लब को प्ले ऑफ में स्थान मिलेगा।
एएफसी अध्यक्ष मोहम्मद बिन हम्माम ने कहा – “अब समय आ गया है कि एशियाई क्लब फुटबॉल अपना नौसिखिया अवतार छोड़े और पेशेवरता को अपनाएँ।“
“अब सिर्फ पेशेवर संस्कृति ही एशियाई फुटबॉल का स्तर बढ़ा सकती है।“
एएफसी पेशेवर लीग तदर्थ समिति के चेयरमेन साबुरो कावाबुची ने कहा कि अब पीछे मुड़कर नहीं देखना है।
उन्होने कहा – “मैने पूरी प्रक्रिया में काफी ऊँचा स्तर रखा था और कहा था कि अपने उद्देश्य की प्राप्ति में हमें कोई कोताही नहीं बरतनी है।“
2009 एएफसी चैम्पियंस लीग का ड्रॉ 7 जनवरी, 2009, को आबुधाबी में निकाला जाएगा तो स्पर्धा के लोगो का लांच 12 दिसंबर को टोक्यो में होना है।
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