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नाज़वी कारिम
कुआलालम्पुर: भारत के उत्तर-पूर्वी कोने में म्यानमार के जंगलों से लगा है मणिपुर जहाँ खेलों का इतना प्रचलन नहीं है।
एक ओर जहाँ भारत की अधिकतर आबादी क्रिकेट के पीछे पागल है वहीं मणिपुर के 24 लाख लोगों के लिए फुटबॉल सर्वोपरी है।
वहाँ के लोगों का फुटबॉल के प्रति प्यार ही इस राज्य में एएफसी विज़न इंडिया प्रोग्राम के तहत शुरू किए गए प्रोजेक्ट मणिपुर की सफलता का राज है।
तीन साल पहले शुरू किए गए इस प्रोजेक्ट के अंतर्गत वहाँ राज्य लीग चरम पर है तो खेल का प्रशासन कटिबद्ध ऑल मणिपुर फुटबॉल एसोसिएशन के हाथों में है।
एएफसी विज़न एशिया निदेशक ब्रेंडन मेंटन मानते है कि प्रोजेक्ट मणिपुर की शुरूआत के पहले से ही वहाँ फुटबॉल के लिए जरूरी मूलभूत सुविधाएँ मौजूद थी।
“मणिपुर की सफलता का कारण है कि वहाँ कोचिंग, शिक्षा और ग्रासरूट्स कार्यक्रमों का ढांचा पहले से ही मौजूद था जिसका फायदा विज़न इंडिया को मिला।“
संघ के कटिबद्ध और पेशेवर अधिकारी विज़न इंडिया की योजना का बेहतरीन ढंग से पालन कर रहे है।
खेल के इस संस्कृति का फायदा मुख्य रूप से भारतीय टीम को मिला है। एएफसी चैलेंज कप जीतने वाली राष्ट्रीय टीम में छह खिलाड़ी इसी राज्य के थे।
उस जीत के कारण भारत 2011 में होने वाले एएफसी एशियन कप के लिए क्वालिफाई हुआ है।
खिताबी जीत से खुश होकर मणिपुर के मुख्यमंत्री ओ. इबोबी सिंह ने टीम के लिए एक लाख रूपए के नगद पुरस्कार की भी घोषणा की है।
पिछले 30 सालों में लगभग 200 से ज्यादा खिलाड़ियों ने विभिन्न आयु समूहों में भारत का प्रतिनिधित्व किया है।
इस राज्य के खिलाड़ियों ने देश के ईस्ट बंगाल, मोहन बागान, मोहम्मडन स्पोर्टिंग, एयर-इंडिया, चर्चिल ब्रदर्स आदि बड़े क्लबों को भी अपनी सेवाएँ दी है।
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